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Sanskrit Quotes / संस्कृत कोट्स

Sanskrit Quotes - संस्कृत एक ऐसी भाषा है जो हमेशा से उच्च रही है। आज के युग में हम सब अंग्रेजी भाषा बोलने के अधीन रहते है लेकिन क्या आपको पता है की अंग्रेजी भाषा भी संस्कृत भाषा से ली गई है। अंग्रेजी भाषा के अंदर ऐसे काफी सरे शब्द जो संस्कृत से लिए गए है पाए जाते है।

संस्कृत हमारी देश की शान है और आज भी बहुत सरे व्यक्ति संस्कृत भाषा को सीखते है और उसका अध्यन भी करते है। सबसे मुख्या किताब "गीता" भी संस्कृत भाषा में लिखी गई है जिसके अंदर सारी परेशानियो का हाल है और उस किताब को बड़े बड़े व्यापारी पढ़ते है और अपने बिज़नेस को भड़ाते है।

भारत की हमेशा से ये मुख्या बात रही है की वे अपने संस्कृति में हमेशा आगे रहा है चाहे वो अलग अलग प्रकार के व्यक्ति, भाषाएँ, प्रथाएं आदि क्यों न हो। कहा जाता है की पुराने ज़माने में लोग संस्कृत भाषा में ही बात किया करते थे लेकिन फिर ब्रिटिश लोग जब से हिंदुस्तान में आये तब से अंग्रेजी भाषा ज्यादा लोग बोलने लगे।

संस्कृत भाषा सीखना भी बड़ा ही आसान होता है। हमको लगता है की संस्कृत के शब्द बहुत कठिन है लेकिन ऐसा कदापि नहीं है। संस्कृति अंग्रेजी से आसान होती है जिसमे शब्दों को बस संस्कृत भाषा में बोलै जाता है। आपको यहाँ पर कोई verb, pronoun आदि लगाने की कोई मुख्या जरूरत नहीं होती है।

Sanskrit Quotes / संस्कृत उद्धरण

आज के इस लेख में मेने आपके लिए कुछ Sanskrit Quotes लिखे है जिन्हे पढ़कर आपको अपनी Sanskrit भाषा पर गर्व होगा और आप की अंतरात्मा को सन्ति मिलेगी।  तो चलिए सीधे भड़ते है Sanskrit Quotes तरफ।  आपसे एक छोटी सी गुरजारिश है की आप इस लेख के साथ अंत तक बने रहिएगा जिससे की आप इस लेख के हर एक Sanskrit Quotes Hindi का आनद ले सके।

Sanskrit Quotes


1. कृते प्रतिकृतं कुर्यात्तादिते प्रतितादितम्।
करनें च तेनैव चुम्बिते प्रतिचुम्बितम् त

अर्थात 

हर कार्रवाई के लिए, एक जवाबी कार्रवाई होनी चाहिए। 
हर प्रहार के लिए एक प्रति-प्रहार और उसी तर्क से,
हर चुंबन के लिए एक जवाबी चुंबन।

2. मूर्खस्य पञ्च चिह्नानि गर्वो दुर्वचनं तथा ।
क्रोधश्च दृढवादश्च परवाक्येष्वनादरः ॥

अर्थात 

मूर्ख के पाँच लक्षण हैं; घमंड, दुष्ट वार्तालाप, क्रोध, जिद्दी तर्क, और 
अन्य लोगों की राय के लिए सम्मान की कमी। (Sanskrit Quotes) 

3. निरपेक्षो निर्विकारो निर्भरः शीतलाशयः ।
अगाधबुद्धिरक्षुब्धो भव चिन्मात्रवासनः ॥

अर्थात

आप सुख साधन रहित, परिवर्तनहीन, निराकार, अचल, अथाह 
जागरूकता और अडिग हैं, इसलिए अपनी जागृति को पकड़े रहो ।

4. यावद्बध्दो मरुद देहे यावच्चित्तं निराकुलम्।
यावद्द्रॄष्टिभ्रुवोर्मध्ये तावत्कालभयं कुत: ॥

अर्थात

जब तक शरीर में सांस रोक दी जाती है, जब तक मन अबाधित रहता है, 
और जब तक ध्यान दोनों भौंहों के बीच लगा है, तब तक मृत्यु से कोई भय नहीं है। (Sanskrit Quotes)

5. निश्चित्वा यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः ।
अवन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते ॥

अर्थात

जिनके प्रयास एक दृढ़ प्रतिबद्धता से शुरु होते हैं, जो कार्य पूर्ण होने तक ज्यादा आराम नहीं करते हैं, 
जो समय बर्बाद नहीं करते हैं और जो अपने विचारों पर नियंत्रण रखते हैं वह बुद्धिमान है ।

6. एतदपि गमिष्यति।

अर्थात

यह भी चला जाएगा |

7. अपि मेरुसमं प्राज्ञमपि शुरमपि स्थिरम् ।
तृणीकरोति तृष्णैका निमेषेण नरोत्तमम् ॥

अर्थात

भले ही कोई व्यक्ति मेरु पर्वत की तरह स्थिर, चतुर, बहादुर दिमाग का हो।
लालच उसे पल भर में घास की तरह खत्म कर सकता है।

8. न कालमतिवर्तन्ते महान्तः स्वेषु कर्मसु ।

अर्थात

महान लोग अपने कर्तव्यों में देरी नहीं करते हैं । (Sanskrit Quotes)

9. स्वस्तिप्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः।
गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु॥

अर्थात

सभी लोगों की भलाई शक्तिशाली नेताओं द्वारा कानून और न्याय के साथ हो। सभी दिव्यांगों और विद्वानों के साथ सफलता बनी रहे और सारा संसार सुखी रहे।

10. सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्।
एतद् विद्यात् समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः॥

अर्थात

जो सब अन्यों के वश में होता है, वह दुःख है। जो सब अपने वश में होता है, वह सुख है। यही संक्षेप में सुख एवं दुःख का लक्षण है। (Sanskrit Quotes)

11. दुर्बलाश्रयो दुःखमावहति ॥

अर्थात

दुर्बल का आश्रय दुःख देता है ।

12. अर्थेषणा न व्यसनेषु गण्यते ॥

अर्थात

घन की अभिलाषा रखना कोई बुराई नहीं मानी जाती ।

13. आत्मायत्तौ वृद्धिविनाशौ ॥

अर्थात

वृद्धि और विनाश अपने हाथ में है । (Sanskrit Quotes)

14. कालवित् कार्यं साधयेत् ॥

अर्थात

समय के महत्व को समझने वाला निश्चय ही अपना कार्य सिद्धि कर पता है ।

15. वृद्धसेवया विज्ञानत् ॥

अर्थात

वृद्ध – सेवा से सत्य ज्ञान प्राप्त होता है ।

16. आपत्सु स्नेहसंयुक्तं मित्रम् ॥

अर्थात

विपत्ति के समय भी स्नेह रखने वाला ही मित्र है ।

17. उपायपूर्वं न दुष्करं स्यात् ॥

अर्थात

उपाय से कार्य कठिन नहीं होता ।

आखिरी शब्द:

संस्कृत एकमात्र ऐसी भाषा है जो सदियों से चली आ रही है और आज भी बिहार, बंगाल, बड़े, बुजुर्ग इस भाषा का प्रयोग वार्तालाप करने के लिए करते है।  ऐसे काफी सारे बुद्धिमान है जिन्होंने संस्कृत सिखने के लिए हिंदुस्तान आकर प्रयास किया।

हमें अपनी भाषा संस्कृत पर गर्व है और चाहे जितनी भी भाषाएँ आ जाये लेकिन ये हमेहा सर्वोत्तम रहेगी। मेरा इस लेख से ये उद्देश्य नहीं है की आप किसी और भाषा को नहीं सीखे बल्कि ये है की संस्कृत भाषा का अंश भी आप अपने अंदर ले जिससे की आप अपने देश की भाषा से जुड़े रहे।

अगर आपको आज के लेख से प्रेणा मिली हो और आप भी संस्कृत भाषा से जुड़े हुए है तो इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे जिससे की लोगो के दिल में संस्कृत का अंश हमेशा मिले।

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